अभिक्रिया की कोटि क्या है | परिभाषा | अभिलक्षण

अभिक्रिया की कोटि किसे कहते है:

“किसी रासायनिक अभिक्रिया मेँ अभिक्रिया के वेग को निर्धारित करने वाले अभिकारक अणुओँ की कुल संख्या को अभिक्रिया की कोटि कहते हैँ । “

या
“किसी रासायनिक अभिक्रिया मेँ सान्द्रता मेँ हुए परिवर्तन के फलस्वरुप अभिकारक अणुओँ के सक्रिय द्रव्यमानोँ की घातोँ के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैँ ।”

माना अभिक्रिया

A       →    उत्पाद

तब

dx/dt ∝  [A]¹

dx/dt = k [A]¹

अभिक्रिया की कोटि = 1 , अर्थात् प्रथम कोटि अभिक्रिया

या

अभिक्रिया

m1A + m2B  →  उत्पाद

तब

dx/dt ∝ [A] m1  × [B] m2

dx/dt = k [A] m1 × [B] m2

अभिक्रिया की कोटि = m1 + m2

अभिक्रिया की कोटि का उदाहरण :
1. H2 + Cl2 →  2 HCl

अभिक्रिया की कोटि = शून्य

2. N2O₅   ⇌    2 NO2 + ½ O2

अभिक्रिया की कोटि = प्रथम

3. CH3COOC2H5 + NaOH  ⇌    CH3COONa + C2H5OH

अभिक्रिया की कोटि = द्वितीय

शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के अभिलक्षण :

1. शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया के वेग
स्थिराँक का मात्रक सान्द्रण समय KI-¹ अर्थात्
मोल लीटर KI-¹ सेकण्ड KI-¹ होता है ।
2. इस अभिक्रिया के लिए सान्द्रता तथा अभिक्रिया की
दर के बीच ग्राफ खीँचने तर एक सरल रेखा प्राप्त होती है ,
अर्थात अभिक्रिया की दर पदार्थ की सान्द्रता पर निर्भर नहीँ करता है |
 
x/dt का t के विपरीत आलेख समय अक्ष के समान्तर
एक सरल रेखा होती है ।
3. अभिक्रिया के किसी भी आंशिक परिवर्तन के
पूर्ण होने मेँ लगा समय प्रारम्भिक सान्द्रता ‘a’ के अनुक्रमानुपाती होता है ।
4. शून्य कोटि अभिक्रियाओँ के पूर्ण होने मेँ एक निश्चित समय लगता है ।
credit:Shubham lecturer

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