ऐमीन के गुण: भौतिक व क्षारीय

ऐमीन के गुण :

ऐमीन के भौतिक गुण:

  1. कम कार्बन वाले ऐमीन में मछली के समान गंध आती है ये गैसीय पदार्थ इसके बाद ये क्रमशः द्रव व ठोस अवस्था में बदल जाते है।
  2. अणुभार बढ़ने के साथ साथ गलनांक व क्वथनांक बढ़ते जाते है क्योंकि अणुभार बढ़ने पर वांडरवाल बल बढ़ते जाते है।
    CH3-NH2 < CH3-CH2-NH2 < CH3-CH2-CH2-NH2
  3. 1 डिग्री में N से दो H जुडी होती है अतः प्रत्येक अणु दो हाइड्रोजन बंध बनाता है , जबकि 3 डिग्री ऐमीन में N पर H नहीं होता अतः 3 डिग्री ऐमीन हाइड्रोजन बंध नहीं बनता अतः समावयवी ऐमीन का बढ़ता क्रम
    30 < 20 < 10 amine
  4. ऐमीन जल में विलेय होते है क्योंकि ये जल के साथ अंतराअणुक हाइड्रोजन बंध बनते है।
  5. एल्कोहल में O व H की विद्युत ऋणताओ में अधिक अंतर होता है अतः ऐल्कोहल में प्रबल हाइड्रोजन बंध बनते है। अतः एल्कोहल का क्वथनांक अधिक होता है जबकि ऐमीन में N व H की विद्युत ऋणताओ में कम अंतर होता है अतः दुर्बल हाइड्रोजन बंध बनता है जिससे ऐमीन का क्वथनांक कम हो जाता है।
    (CH3)2NH < CH3-CH2-NH2 < C2H5OH
  6. ऐमीन के तुलना में एल्कोहल जल में अधिक विलेय होते है क्योंकि एल्कोहल जल के अणुओं के साथ प्रबल हाइड्रोजन बंध बनते है।
  7. ऐनिलीन में जल विरोधी भाग बड़ा होने के कारण जल के साथ हाइड्रोजन बंध बनने की क्षमता कम हो जाता है , अतः जल में कम विलेय होता है।

ऐमीन के क्षारीय गुण :

वे पदार्थ जो प्रोटोन ग्रहण करते है उन्हें क्षार कहते है , प्रोटॉन ग्रहण करने की प्रवृति जितनी ज़्यादा होती है क्षारीय गुण उतने ही अधिक होते है।


किसी ऐमीन में नाइट्रोजन पर जितने ज़्यादा एल्किल समूह जुड़े होते है +I प्रभाव के कारण नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व उतना ही अधिक हो जाता है। जिससे प्रोटोन ग्रहण करने की प्रवृति अधिक हो जाती है , अतः क्षारीय गुण बढ़ते है।
क्षारीय प्रवृति का उपरोक्त बढ़ता हुआ क्रम केवल गैसीय अवस्था में होने पर ही सत्य है परन्तु जब ऐमीन जलीय विलयन के रूप में होते है तो अन्य कारकों पर भी ध्यान दिया जाता है ये कारक निम्न है।

  1. त्रिविम बाधा :
    नाइट्रोजन पर जितने ज़्यादा व बड़े आकार के एल्किल समूह होते है प्रोटोन ग्रहण करने में उतनी अधिक त्रिविम बाधा का सामना करना पड़ता है।
  2. विलायक योजन या जल योजन :
    ऐमीन की क्षारीय प्रवृति इस तथ्य पर भी निर्भर करती है की प्रोटोन ग्रहण करने के बाद बना धनायन कितना अधिक स्थायी है।
    जिसे ऐमीन का धनायन जितना ज़्यादा स्थायी होगा वह उतना ही प्रबल क्षार होगा।
    नोट : वह ऐमीन जिसका धनायन जितने अधिक जल के अणुओ से घिरा रहता है वह उतना ही अधिक स्थायी होता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.