क्रिस्टल जालक के प्रकार, परिभाषा, संरचना, एकक सेल

हेलो स्टूडेंट इस आर्टिकल में हम क्रिस्टल जालक लक्षण व इकाई कोष्टिका के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे |

क्रिस्टल जालक की परिभाषा क्या है – crystal jal kise kahate hain:

कोई भी क्रिस्टल अवयवी कणों से मिलकर बना होता है ये अवयवी कण परमाणु , अणु या आयन तीनों में से कुछ भी हो सकते है , क्रिस्टल में अवयवी कणों (परमाणु , अणु , आयन) की तीनो विमाओं में निश्चित ज्यामिति व्यवस्था होती है।

” क्रिस्टल में अवयवी कणों की तीनो विमाओं में अर्थात त्रिविमीय व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते है।”

या

“त्रिविम आकाश में किसी क्रिस्टल की इकाइयों की एक नियमित व्यवस्था होती है और क्रिस्टल में इकाइयों की इस नियमित व्यवस्था को ही त्रिविम जालक या क्रिस्टल जालक कहा जाता है। ”

हम जानते है कि कोई भी क्रिस्टल परमाणु , अणु या आयन अवयवी कणों से मिलकर बने होते है , जब इन अवयवी कणों को आपस में रेखा द्वारा जोड़ दिया जाता है या मिला दिया जाता है तो क्रिस्टल जालक का आरेख प्राप्त होता है।

यदि कोई क्रिस्टल आयनों से मिलकर बना होता है अर्थात यदि किसी क्रिस्टल में अवयवी कण आयन हो तो इसे आयनिक जालक कहते है।
यदि किसी क्रिस्टल के परमाणु सहसंयोजक बंधो द्वारा बंधे हुए हो तो उन्हें सहसंयोजक क्रिस्टल जालक कहते है।ऊपर चित्र में दर्शाए अनुसार प्रत्येक अवयवी कण एक बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है जिसे जालक बिंदु या जालक स्थल कहते है।

किसी भी क्रिस्टल जालक में कई तल होते है अत: किसी क्रिस्टल जालक में बने तल को क्रिस्टल तल कहते है।

यदि जालक के सभी अवयवी कणों को सीधी रेखा द्वारा जोड़ा जाए तो इससे जालक की ज्यामिति प्रदर्शित होती है जैसे हमने ऊपर कणों को आपस में जोड़ा है तो इससे एक ज्यामिति बन जाती है यह ही जालक की ज्यामिति है।

कोई भी क्रिस्टल इसके अवयवी कणों से मिलकर बना होता है और ये अवयवी कण परमाणु , अणु या आयन कुछ भी हो सकते है , अर्थात क्रिस्टल परमाणु , अणु या आयन से मिलकर बना होता है इन्हें अवयवी कण कहते है।

क्रिस्टल जालक के लक्षण :

  1. क्रिस्टल जालक में स्थित प्रत्येक बिंदु को जालक बिंदु कहते है।
  2. प्रत्येक जालक बिंदु अणु-परमाणु या आयन को निरूपित करता है।
  3. जालक बिंदुओं को सीधी रेखा से मिलाने पर क्रिस्टल जालक की ज्यामिति बनती हैं।

इकाई कोष्टिका (unit cell ) यूनिट सेल : 

क्रिस्टल चालक की छोटी से छोटी इकाई जिसकी बार बार पुनरावर्ती होती है उसे यूनिट सेल (unit cell ) कहते है।

इकाई सेल के पैरामीटर(parameters of unit cell) :

यूनिट सेल की पहचान 6 पैरामीटर से की जाती है।

1. अक्षीय दूरी : इसे abc से व्यक्त करते है।

2. अक्षीय कोण : अक्षो के मध्य बने कोण को अक्षीय कोण कहते है।  इन्हे α , β , γ से व्यक्त करते है।

यूनिट सेल के प्रकार(types of unit cell ) : 

(A) आद्य मात्रक कोष्ठिका (primitive unit cell):

इस मात्रक कोष्ठिका में घन के आठों कोनों पर आठ परमाणु होते है।

यह यूनिट सेल एक परमाणु की बनी होती है।

इसकी गणना निम्न प्रकार से की जाती है।

कुल परमाणु की संख्या = कोनों पर स्थित परमाणु 8 x 1/8 = 1

(B) केंद्रित मात्रक कोष्ठिका:

ये तीन प्रकार की होती है।

(1) अन्तः (काय ) केंद्रित मात्रक कोष्ठिका(body centered unit cell)  :

इस unit cell में घन के आठों कोनो पर आठ परमाणु होते है।  तथा घन के केंद्र में एक परमाणु स्थित होता है।

यह यूनिट सेल दो परमाणुओं की बनी होती है।

कुल परमाणुओं की संख्या = (कोनों पर स्थित कुल परमाणु ) 8 x 1/8     +   (काय केंद्रित परमाणु ) 1 x 1

= 1 + 1 = 2

(2) फलक केंद्रित मात्रक कोष्ठिका (face centered unit cell)  :

इस यूनिट सेल में घन के आठों कोनों पर आठ परमाणु होते है।  तथा प्रत्येक फलक के केंद्र में एक एक परमाणु स्थित होता है।

यह यूनिट सेल चार परमाणुओं की बनी होती है इसकी गणना निम्न प्रकार से की जाती है।

कुल परमाणुओं की संख्या = (कोनों पर स्थित कुल परमाणु ) 8 x 1/8  + (फलक केंद्रित परमाणुओं की संख्या ) 6 x 1/2

= 1 + 3 = 4

(3) अन्तः केंद्रित मात्रक कोष्ठिका (base centered unit cell) : 

घन के आठों कोनो पर आठ परमाणु होते है तथा आमने सामने के दो फलको के केन्द्र में भी एक एक परमाणु स्थित होता है।

यह unit cell दो परमाणुओं से मिलकर बनी होती है इसकी गणना निम्न प्रकार से की जाती है।

कुल परमाणुओं की संख्या = 8 x 1/8 + 2 x 1/2

= 1 + 1

= 2

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