परासरण और विसरण में अन्तर

परासरण :

विलायक का कम सान्द्रता के विलयन से अधिक सान्द्रता के विलयन की ओर अर्द्धपारगम्य झिल्ली में से होकर स्वतः प्रवाह करते हैं , परासरण कहलाता है ।

विसरण :

वह क्रियाविधि जिसमें विलेय के अणु या कण विलयन में जाकर उसके सभी भागों की सान्द्रता को समान कर देते हैं , विसरण कहलाता है ।

परासरण तथा विसरण में अन्तर :

(1) परासरण में अर्द्धपारगम्य झिल्ली का होना आवश्यक होता है । जबकि विसरण में किसी भी प्रकार की झिल्ली की आवश्कता नहीं होती है ।

(2) परासरण में कणों का प्रवाह केवल एक दिशा में होता है , अर्थात् केवल विलायक के कण गति करते हैं , जबकि विसरण में विलायक और विलेय दोनों कण विपरीत दिशाओं में गति करते हैं ।

(3) परासरण में विलायक के कण कम सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयन की ओर प्रवाहित होते हैँ , जबकि विसरण में कणों का प्रवाह अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर होता है ।

Note: 

  • दो समान सान्द्रता वाले विलयनों का परासरण दाब समान होता है।  इन्हें सम परासरी विलयन कहते है।
  • दो अलग अलग सान्द्रता वाले विलयनों में से वह विलयन जिसका परासरण दाब अधिक होता है उसे अति परासरी कहते है। तथा वह विलय जिसका परासरण दाब कम होता है उसे hypotonic solution (अल्प परासरी ) विलयन कहते है।
credit:Shiv Coaching Classes India

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