विसरण तथा परासरण क्या है | परिभाषा | सूत्र 

विसरण किसे कहते है: – visran kya hai:

पदार्थ के अणु अधिक सान्द्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर स्वतः ही गति करते है जब तक की सभी जगह सान्द्रता समान न हो जाये।

उदाहरण : जल में स्याही की बून्द डालने पर समांगी विलयन का बनना।

परासरण किसे कहते है: – prasaran kya hota hai:

अर्द्ध पारगम्य छिल्ली द्वारा जल के अणुओं कम सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर जाना परासरण कहलाता है।

एक U आकार की काँच की नाली के मध्य में अर्द्ध पारगम्य छिल्ली व्यवस्थित करके उसमे एक तरफ जल व दूसरी तरफ विलयन भर लेते है।  जल तथा विलयन की सतह पर जल रोधी पिस्टन लगे होते है।  परासरण की क्रिया द्वारा जल के अणु शुद्ध जल से विलयन की ओर प्रवेश करते है जिससे विलयन की सतह पर लगा पिस्टन ऊपर की ओर सरकने लगता है।  इस पिस्टन के पुन: उसी अवस्था में लाने के लिए विलयन की सतह पर जो दाब डाला है उसे परासरण दाब कहते है।

अतः अर्द्ध पारगम्य छिल्ली द्वारा जल के अणुओं का विलायक से विलयन में प्रवेश करने के लिए विलयन की सतह पर जो दाब डाला जाता है उसे परासरण दाब कहते है।  इसे π से व्यक्त करते है।

परासरण की क्रिया के प्रकार:

परासरण की क्रिया के दो प्रकार होते हैं |

1. बहि परासरण:

जब किसी कोशिका को उच्च सान्द्रता वाले विलयन में रखा जाता हैं , तो विलायक के अणु कोशिका से बाह्य विलयन में बहि परासरण द्वारा गमन करने लगते हैं | यह क्रिया बहि परासरण कहलाती हैं | इस क्रिया में कोशिका सिकुड़ जाती हैं , जिसे जीवद्रव्य संकुचन ( Plasmolysis ) भी कहते हैं |

2. अंतः परासरण:

जब किसी कोशिका को निम्न सान्द्रता वाले विलयन रखा जाता हैं , तो विलायक के अणु कोशिका के अंदर अंतः परासरण द्वारा गमन करने लगते हैं | इस क्रिया को अंतः परासरण कहते हैं | इसमें कोशिका फूल जाती हैं , जिससे इसे जीवद्रव्य विकुंचन भी कहते हैं |

उदाहरण – किशमिश का फूलना ( पानी मे रखने पर ) |

credit:digital Study24

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