Apvartan Ke Niyam

अपवर्तन के नियम – Apvartan Ke Niyam

Apvartan Ke Niyam:अपवर्तन का नियम परीक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण टॉपिक है. अक्सर अपवर्तन के नियम से सम्बंधित प्रश्न जैसे कि अपवर्तन के नियम के प्रकार आदि  प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान प्रश्न पूछे जाते है. अतः परीक्षार्थियों को अपवर्तन के नियम से जुड़े सभी सम्बंधित प्रश्नों का भलीभांति तैयार कर लेना चाहिए

Apvartan Ke Niyam

अपवर्तन: :-  जब प्रकाश किरण एक कैमरा से प्रसारित होता है। रोगाणु रोगाणुओं को रोगाणुओं की स्थिति से I प्रकाश की इस घटना को अपवर्तन है

अपवर्तन के नियम

अपवर्तन का नियम (स्नेल का नियम) :-

  इस नियम के अनुसार आप किस की ज्या व अपवर्तन की ज्या का ज्या का है किंवी दो कैमरे के लिए सत्य है। इसे अपवर्तन का नियम या स्नैल का नियम भी है। इस कैमरे के अपवर्तनांक के बारे में अप्रकाशित किरणें, अपवर्तित किरणें इम्ब्स एक ही तल के एक बिंदु है।

अपवर्तन की घटनाओं में विषमता वाले गुण प्रतिरोधी गुण होते हैं।

जब प्रकाश की किरणें विकिरण में किरणें होते हैं, तो वे तीव्रता से खराब होते हैं।

जब किरणें किरणें अंदर से सूक्ष्म होती हैं, तो I

प्रकाश की सघनता वाले कैमरे में वायु प्रदूषण, जल, जल, तेज प्रकाश की चाल में, और सबसे कम प्रभावी होगा।

किन्वी दो प्रसारणों का एक-दूसरे के सापेक्ष अपवर्तनांको का गुणनफल एक है।

किसी वस्तु का अपवर्तनांक वस्तुओं की प्रकृति पर दैध्र्य पर अवधारण होता है।

2. अपवर्तन की घटना में परिवर्तन नहीं हुआ है। परन्तु वेग और तरंग दध्राय बदल जाती है।

3. सी = वी λ सोर्स से , ।

4. विरल कैमरे के संचार में प्रकाश का वेग कम होता है। इस आधार पर हवा, जल, काचक में हवा चल रही है।

5. जब प्रकाश की किरणें किरणें तेज होती हैं, तो तीव्र प्रकाश विकिरण से संचार तेज होती है।

6. निष्क्रिय का अपवर्तनाक का मान 1 हवा का मान 1.00029 जल का अपवर्तनाक 4/3 और का अपवर्तनांक सबसे अधिक 2.4.

अपवर्तन की घटना

प्रकाश के अपवर्तन से अलग अलग प्रकार के मौसम में भिन्न होता है:

प्रकाश के अपवर्तन के रूप में भिन्न होते हैं।

  • मौसम   के अनुकूल होने के साथ-साथ हवा के अनुकूल होने के कारण यह बेहतर होने वाला है। चमकने की स्थिति खराब होने की स्थिति में दिखाई देती है।
  • सूरज की रोशनी से सूर्य की किरणें सूर्य की स्थिति: –  सूर्य उदय होने से पहले सूर्य की किरणों से उत्पन्न होने के कारण सूर्य के प्रकाश से उत्पन्न होने वाली तरंगें हवा से खराब होने की स्थिति में होती हैं। ओर हो जाती हैं तथा प्रेक्षक तक पहुंचती है तो यह परीक्षक को क्षैतिज से ऊपर से आती हुई प्रतीत होती है जिसके कारण सूर्य है सूर्योदय से पहले व सूर्यास्त के बाद भी दिखाई पड़ता है यह अंतराल लगभग 2 मिनट होता है जिससे दिन की अवधि 4 मिनट विस्तार है
  • संकट के समय खराब होने के बाद खराब होने पर भी ऐसा ही होगा:   जब एक बार फिर से खराब होने पर भी ऐसा ही होगा तो दोबारा खराब होने पर भी ऐसा ही होगा। मारक प्रकाश किरणें किरणें प्रकाश किरण के समरूपता में प्रभाव उत्पन्न होते हैं।
  • जल में दिखने वाले समूह का संपर्क गहरा होता है: – जल के संपर्क में आने पर दिखने वाला तरंगदैर्घ्य से प्रभावित होता है। इस प्रकार आइकन दिखाई दे रहा है।
credit:Study with Surendra

आर्टिकल में आपने अपवर्तन के नियम  को पढ़ा। हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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