क्लीमेन्सन अपचयन, फेलिंग विलयन, वोल्फ किश्नर

क्लीमेन्सन अपचयन (Clemenson deprecation)

यह कार्बोनिल यौगिकों को एल्केन में अपचयित कर देता है , इस क्रिया में -CO- समूह -CH2– समूह में बदल जाता है।  इसमें जिंक अमलगम व सान्द्र HCl उत्प्रेरक काम में लेते है।

वोल्फ किश्नर (Wolf Kishner) :

जब कार्बोनिल यौगिको के हाइड्रेज़ोन व्युत्पन्नों को एथिलीन ग्लाइकोन तथा KOH के साथ गरम किया जाता है तो एल्केन बनती है।

ऑक्सीकरण : 

अम्लीय KMnO4 , क्षारीय KMnO4 , अम्लीय K2Cr2O7 ,  तनु HNO3  ,  टॉलेन अभिकर्मक , फेलिंग विलयन आदि द्वारा एल्डिहाइड ऑक्सीकृत होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल बनते है।

HCHO + (O) →  H-COOH

CH3-CHO + (O) → CH3-COOH

R-CHO + (O) →  R-COOH

फेलिंग विलयन से क्रिया (reaction from Failing Solutions) :

यह दो विलयनों को मिलाने से बनता है।

 फेलिंग विलयन(A) : यह कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन है।

फेलिंग विलयन (B) : यह सोडियम पोटेशियम टार्टरेट (रिशेल लवण) व NaOH का जल में बना रंगहीन विलयन है।

  1. सभी एल्डिहाइड फेलिंग विलयन के साथ क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल विलयन बनाते है।

R-CHO + 2Cu2+ + 5OH– → Cu2O + R-COO– + 3H2O

नोट : यदि उपरोक्त समीकरण न हो तो निम्न समीकरण भी लिख सकते है।

R-CHO + 2CuO → Cu2O + R-COOH

  1. टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया (Tollen reagent reaction):

AgNO3 में NH4-OH मिलाने पर  टॉलेन अभिकर्मक बनता है।

AgNO3  + NH4-OH  →  AgOH + NH4NO3

Ag2O भी NH4OH  से क्रिया कर लेता है तथा [Ag(NH3)2]OH बना लेता है इसे टॉलेन अभिकर्मक कहते है।

Ag2O + 4NH4OH →  2[Ag(NH3)2]OH + 2H2O

सभी एल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया करके रजत दर्पण बनाते है।

R-CHO + 2[Ag(NH3)2]OH → 2Ag + 4NH3 + H2O + R-COOH

Or

R-CHO + Ag2O → 2Ag + R-COOH

नोट : कीटोन टॉलेन अभिकर्मक व फेलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते है।

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