द्रवीय धावन ,गुरुत्वीय पृथक्करण विधि ,चुम्बकीय पृथक्करण विधि

द्रवीय धावन:द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि | चुम्बकीय पृथक्करण विधि परीक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण टॉपिक है. अक्सर द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि | चुम्बकीय पृथक्करण विधि से सम्बंधित प्रश्न जैसे कि गुरुत्वीय पृथक्करण विधि | चुम्बकीय पृथक्करण विधि आदि  प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान प्रश्न पूछे जाते है. अतः परीक्षार्थियों को द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि | चुम्बकीय पृथक्करण विधि से जुड़े सभी सम्बंधित प्रश्नों का भलीभांति तैयार कर लेना चाहिए

द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि | चुम्बकीय पृथक्करण विधि

अयस्क का सान्द्रण :

अयस्क से व्यर्थ के पदार्थ को हटाना अयस्क का सांद्रण कहलाता है।  अयस्क का सांद्रण निम्न विधियों से किया जा सकता है।

द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि:

जब अयस्क तथा आधात्री के घनत्व में अधिक अंतर होता है तो यह विधि काम में लेते है।

एक ढालू तल वाली मेज पर पिसा हुआ अयस्क रखकर उसमे जल प्रवाहित करते है जिससे आधात्री के हल्के कण बहकर अलग हो जाते है जबकि अयस्क के बाहरी कण मेज शेष रह जाते है।

चुम्बकीय पृथक्करण विधि :

चुम्बकीय गुणों पर आधारित अयस्कों का सान्द्रण इस विधि से किया जाता है।

चुम्बक के दो रोलरों के मध्य एक गतिशील पट्टे पर पिसा अयस्क डालते है जिससे अनुचुम्बकीय पदार्थ पट्टे से दूर तथा चुम्बकीय पदार्थ पट्टे की ओर गिरते है।

credit:Sunita sahu chemistry total solution. cts

आर्टिकल में आपने द्रवीय धावन  को पढ़ा। हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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