Huk Ka Niyam

हुक के नियम – Huk Ka Niyam

Huk Ka Niyam:हुक के नियम परीक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण टॉपिक है. अक्सर हुक के नियम से सम्बंधित प्रश्न जैसे कि हुक के नियम के प्रकार आदि  प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान प्रश्न पूछे जाते है. अतः परीक्षार्थियों को हुक के नियम से जुड़े सभी सम्बंधित प्रश्नों का भलीभांति तैयार कर लेना चाहिए।

Huk Ka Niyam

किसी ठोस की प्रत्यास्थता को प्रत्यास्थता के नियम द्वारा निर्धारित किया जाता है जिसे हुक के नियम द्वारा दर्शाया जाता है। विज्ञान और इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में स्प्रिंग के बल और दूरी के बीच संबंध का पता लगाने के लिए इस नियम का उपयोग किया जाता है।

हुक का नियम: परिभाषा

अंग्रेजी वैज्ञानिक रॉबर्ट हूक ने हुक के नियम में खोज की।

हुक्स का प्रत्यास्थता का नियम अंग्रेजी वैज्ञानिक रोबर्ट हुक ने सन 1676 में दिया था।, जिसके अनुसार स्प्रिंग को कुछ दूरी तक बढ़ाने या संपीड़ित करने के लिए आवश्यक बल उस दूरी के समानुपाती होता है। हुक का नियम वहाँ महत्व रखता है, जहां कोई प्रत्यास्थ निकाय, विकृत होता है और इसका उपयोग करके आप जटिल वस्तुओं के विकृति और प्रतिबल के बीच संबंध निकाल सकते हैं।

स्प्रिंग के लिए हुक का नियम प्रायः इस परिपाटी के तहत कहा जाता है कि किसी (प्रत्यास्थ) स्प्रिंग की लम्बाई में परिवर्तन, उस पर आरोपित बल के समानुपाती होता है।इस प्रकार, हूक के नियम का सूत्र है::

F = -Kx

जहां k स्थिरांक है और x दूरी है। नकारात्मक चिन्ह का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि पुनर्स्थापन बल की दिशा विस्थापन के विपरीत होती है।

हुक के नियम के अनुप्रयोग:

हुक के नियम के अनुप्रयोग हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपने सामने कई सामान्य वस्तुओं में देखे जा सकते हैं। कुछ अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:

 उनका यह नियम किसी वस्तु में उत्पन्न छोटे विरूपण से सम्बंधित था , इस नियम के द्वारा उन्होंने प्रतिबल और विकृति में एक सम्बन्ध स्थापित किया।

हुक के नियम के अनुसार “प्रत्यास्थता सीमा के भीतर किसी वस्तु पर आरोपित प्रतिबल का मान हमेशा उस वस्तु में उत्पन्न विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है , इसे ही हूक का नियम कहते है। ”

अर्थात प्रत्यास्थता सीमा के अन्दर प्रतिबल , विकृति के समानुपाती होता है।

प्रतिबल ∝ विकृति

समानुपाती का चिन्ह हटाने पर

प्रतिबल = E x विकृति

यहाँ E = समानुपाती नियतांक है जिसे प्रत्यास्थता गुणांक कहते है। प्रत्यास्थता गुणांक का मान प्रतिबल पर तथा वस्तु के किस प्रकार की विकृति उत्पन्न हो रही है , इस बात पर निर्भर करता है।

जब प्रत्यास्थता सीमा के भीतर , प्रतिबल और उत्पन्न विकृति के मध्य ग्राफ खिंचा जाता है तो हम पाते है यह ग्राफ एक सीधी रेखा के रूप में प्राप्त होता है

हुक के नियम का उपयोग स्प्रिंग्स के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

यह कई अन्य स्थितियों में भी लागू किया जाता है जहां एक लोचदार वस्तु विकृत होती है।

इसके उदाहरणों में एक गुब्बारा फुलाया जाना, एक रबर बैंड पर खींचना और एक विशाल भवन को गिराने के लिए आवश्यक हवा की मात्रा शामिल है।

credit:Khan Sir Knowledge Centre

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