Mendlif Ka Avart Niyam

मेंडलीफ की आवर्त सारणी के नियम – Mendlif Ka Avart Niyam

Mendlif Ka Avart Niyam:डी. मित्र मेंडलीफ (इसके अलावा मेन्डेलीव या मेन्डेलेयेव के रूप में भी उच्चारण) एक रूसी रासायनिज्ञ ने उस समय ज्ञात सभी 63 तत्वों के और उनके यौगिकों के गुणों का अध्ययन किया। तत्वों की उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्था करने पर उन्होंने पाया कि समान गुणों वाले तत्व एक नियमित अंतर पर आते हैं। 1869 में उन्होंने अपने अवलोकन को निम्नलिखित कथन जिसे ‘मेंडलीफ की आवर्त सारणी’ कहा जाता है के रूप में प्रस्तुत किया। तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन होते हैं। आवर्ती फलन की एक निश्चित अंतराल के बाद पुनरावृत्ति होती है। मेंडलीफ ने तत्वों को एक सारणी के रूप में व्यवस्थित किया जिसे मेंडलीफ की आवर्त सारणी के रूप में जाना जाता है।

Mendlif Ka Avart Niyam

मेंडलीफ ने तत्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते हुये क्रम से क्षैतिज पंक्तियों में तब तक व्यवस्थित किया जब तक कि उनको एक तत्व जिसके गुण पहले तत्व के समान मिले। फिर उन्होंने इस तत्व को पहले तत्व के नीचे रखा और इस तरह तत्वों की दूसरी पंक्ति शुरू की। मेंडलीफ वर्गीकरण की सफलता का कारण उनके द्वारा तत्वों के परमाणु द्रव्यमान से अधिक जोर तत्वों के गुण पर देना था। कभी-कभी उनको ऐसा तत्व नहीं मिला जिसे एक विशेष स्थान पर रखा जा सके। इस स्थान को उन्होंने बाद में खोज किये गये तत्वों के लिये रिक्त छोड़ दिया। उन्होंने कुछ ऐसे तत्वों और उनके यौगिकों के गुणों के विषय में काफी सटीक भविष्यवाणी की। कुछ मामलों में कुछ तत्वों के क्रम को उलटना पड़ा। यदि उनके गुणों का बेहतर मिलान होता। इस तरह की कार्यवाही द्वारा उन्होंने सभी ज्ञात तत्वों को आवर्त सारणी में सारणी में दिखाये गये ढंग से व्यवस्थित किया।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी की मुख्य विशेषतायें

इस आवर्त सारणी की मुख्य विशेषतायें।

  1. तत्व, आवर्त सारणी में पंक्तियों और स्तंभों में व्यवस्थित होते हैं।
  2. क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं। आवर्त सारण में छ: आवर्त है ये संख्या 1 से 6 (अरबी अंक) तक दी गई है। चौथे, पांचवें एवं छठे आवर्त में प्रत्येक के दो श्रेणी हैं।
  3. एक ही आवर्त के तत्वों के गुण नियमित रूप से क्रम से बदलते रहते हैं। (यानि वृद्धि या कमी दिखाते है) यदि बांयें से दायें ओर आगे बढ़ें तो।
  4. खड़े स्तंभों को समूह कहा जाता है। I से लेकर VIII (अरबी संख्या) तक 8 स्तंभ होते हैं।
  5. वर्ग I से VII तक उपसमूह A और B में विभाजित हैं। हालांकि समूह VIII में प्रत्येक आवर्त में तीन तत्व शामिल है।
  6. एक विशेष समूह में मौजूद सभी तत्व रासायनिक प्रकृति में समान हैं। वह ऊपर से नीचे तक भौतिक और रासायनिक गुणों में नियमित रूप से अनुक्रमण दिखाते हैं।

मेंडलीफ की आवर्त वर्गीकरण के गुण –

सभी तत्वों का वर्गीकरण : मेंडलीफ वर्गीकरण में सभी ज्ञात 63 तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आधार पर सम्मिलित किया गया है।

परमाणु द्रव्यमान में सुधार : कुछ तत्वों जैसे बेरीलियम (Be), सोना (Au) और र्इण्डीयुम (In) के परमाणु द्रव्यमान में सुधार किया गया।

नये तत्वों की भविष्यवाणी : जब भी मेंडलीफ ने आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था की और उम्मीद के अनुसार गुणों वाला तत्व न मिलने पर रिक्त स्थान बाद में खोजे जाने वाले अज्ञात तत्वों के लिये छोड़ दिया। उन्होंने ऐसे तत्वों और उनके यौगिकों के गुणों की भी भविष्यवाणी की। उदाहरण के लिये उन्होंने सिलिकान के नीचे खाली स्थान के लिये अज्ञात तत्व के अस्तित्व की भविष्यवाणी की जो आवर्त सारणी के एक ही वर्ग चतुर्थ बी का था। उन्होंने उसे ऐका-सिलिकान का नाम (अर्थात सिलिकान के नीचे स्थित) दिया। बाद में 1886 में जर्मनी के सीए विकलर ने इस तत्व की खोज की और इसे जरमेनियम का नाम दिया। इस तत्व के वास्तविक गुणों और भविष्यवाणी में उल्लेखनीय समानता थी। एका बोरोन (स्कैन्डियम) और एका एल्यूमिनियम (गैलियम) मेंडलीफ द्वारा अज्ञात तत्वों की भविष्यवाणी के दो उदाहरण है।

तत्वों की संयोजकता: मेन्डलीक के वर्गीकरण ने तत्वों की सयोजकता को समझने में सहायता की। तत्वों की सयोजकता समूह संख्या के द्वारा दी गई। उदाहरण के लिए समूह 1 के सभी तत्वों जैसे लीथियम हाइड्रोजनए सोडियमए पौटेशियमए रुबीडियमए सिजियम की संयोजकता एक होती है।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष –

मेंडलीफ की आवर्त सारणी एक महान सफलता थी परन्तु इसमें दोष थे

हाइड्रोजन की स्थिति : IA वर्ग में हाइड्रोजन की क्षारक धातु के साथ स्थिति संदिग्ध है क्योंकि यह क्षारक धातु और हैलोजन (वर्ग VII A) दोनों के ही समान है।

समस्थानकों की स्थिति : एक तत्व के सभी समस्थानकों के परमाणुओं का द्रव्यमान भिन्न होता है। अत: उनमें से हर एक को अलग स्थान दिया जाना चाहिये। दूसरी ओर वह क्योंकि रसायन की दृष्टि से एक समान हैं। अत: उन्हें एक ही स्थान पर रखा जाना चाहिये। उदाहरण के लिए कार्बन के दो समस्थानिकों को 126 C ] 146 C प्रदर्शित किया गया है लेकिन एक ही स्थान पर रखा गया है। वास्तव में मेंडलीफ की आवर्त सारणी (हालांकि सही ढंग से) में विभिन्न समस्थानकों को कोई स्थान नहीं दिया गया था।

तत्वों के विषम’ जोड़े : कुछ स्थानों पर अधिक परमाणु भार वाले तत्व को कम परमाणु भार वाले तत्व से उनके गुणों के कारण पहले रख दिया गया था। उदाहरण के लिये उच्च परमाणु द्रव्यमान (58.9) के साथ कोबाल्ट को कम परमाणु द्रव्यमान (58.7) निकल के पहले रखा गया था। अन्य ऐसे जोड़े हैं। (i) टेल्यूरीयम (127.6) को आयोडीन (129.6) से पहले रखा जाता है और (ii) आर्गन (39.9) को पोटेशियम (39.1) से पहले रखा जाता है।

रासायनिक असृदश तत्वों का समूहन : तांबे और चांदी जैसे तत्वों की क्षार धातु (लीथियम, सोडियम आदि) के साथ कोई समानता न होते हुये भी उनको एक साथ प् वर्ग में वर्गीकृत किया गया है।

समान रासायनिक तत्वों का पृथक्करण : सोना और प्लेटिनम तत्व जो रासायनिक दृष्टि से समान हैं को अलग अलग वर्ग में रखा गया है।

 इलेक्ट्रानिक व्यवस्था : यह तत्वों की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था की व्याख्या नहीं करता है।

credit:Shameem Sir

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