Nausadar ka Rasayanik Sutra, Naam, उपयोग

Nausadar ka Rasayanik Sutra: नौसादर (अमोनियम नीरेय) एक अकार्बनिक यौगिक है जिसका अणुसूत्र NH4Cl है। यह श्वेत रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ है जो जल में अत्यधिक विलेय है। इसका जलीय विलयन हल्का अम्लीय होता है। प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला साल अमोनियक (Sal ammoniac) अमोनियम नीरेय (क्लोराइड) का खनिज (mineralogical) रूप है। .

नौसादर क्या है ?

आयुर्वेद चिकित्सा में इसे साधारण रसों में गिना जाता है | यह सफ़ेद रंग का दानेदार लवण द्रव्य होता है, जो करीर और पीलू वृक्षों के कोष्ठों को जलाने पर क्षार के रूप में प्राप्त होता है | ईंटो के भट्टे से प्राप्त राख से भी यह क्षार रूप में प्राप्त किया जाता है | पुराने समय में ऊंट की लीद जलाकर भी क्षार रूप में इसको प्राप्त किया जाता था |

आधुनिक विज्ञानं अनुसार यह एक अकार्बनिक यौगिक है जिसका सूत्र NH4CL होता है | यह श्वेत रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ होता है जो केमिकल उपयोग एवं औषधि उपयोग दोनों में काम में लिया जाता है |

नौसादर का रासायनिक सूत्र

NH4Cl

नौसादर का रासायनिक नाम

अमोनियमक्लोराईड

नौसादर का शोधन

आयुर्वेद चिकित्सा में रस, उपरस, विष, उपविष एवं खनिज पदार्थों आदि का शोधन करके चिकित्सा उपयोग में लिया जाता है अर्थात इन द्रव्यों में उपस्थित अशुद्धियों को दूर करके इन्हें दवा बनाने के उपयोग में लिया जाता है |

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके शोधन का वर्णन प्राप्त नही होता | इसका शोधन करने के लिए नवसादर 1 भाग एवं जल 3 भाग लेकर ; इसे जल में घोलकर मोटे एवं साफ़ वस्त्र से दो बार छान लिया जाता है |

Also read: Sindoor Ka Rasayanik Sutra, Naam उपयोग

अब उस छने हुए जल को अग्नि पर चढ़ा कर पाक किया जाता है | पात्र में से जब जल भाप बन कर उड़ जाए तो पैंदे में शुद्ध नौसादर प्राप्त होता है | इसी नौसादर का आयुर्वेदिक उपयोग किया जाता है | अर्थात चिकित्सा के लिए उपयोग में लिया जाता है |

नौसादर के फायदे

इसे त्रिदोषघन औषधि माना जाता है | यह दीपन, पाचन, गुल्म, प्लीहा रोग एवं मुखशोष में विशेषकर उपयोग में ली जाती है | अन्य उपयोग इन बिन्दुओं के माध्यम से बताएं गए है |

  • अपच एवं अजीर्ण के कारण पेट दर्द हो तो नौसादर के साथ सुहागा एवं सौंफ मिलाकर चूर्ण बना कर सेवन करने से आराम मिलता है |
  • इसके साथ सुहागा एवं सौंफ मिलाकर सेवन करने से यह दीपन एवं पाचन का कार्य भी करती है |
  • दांतों की अधिकतर समस्याओं में नौसादर के साथ, संधव नमक एवं फिटकरी (स्फटिका) मिलाकर मलने से दांतों का दर्द, सुजन एवं कीड़ों की समस्या से निजात मिलती है |
  • श्वाँस या अस्थमा की दिक्कत में आयुर्वेदिक वैद्य नौसादर को पान में रखकर खाना बताते है |
  • नवसादर के साथ बराबर मात्रा में चुना एवं कपूर मिलाकर एक कांच की शीशी में रख लें | जुकाम में इसे सूंघने से बंद नाक खुलता है | नकसीर में भी यह उपयोग करने से नाक से खून आना बंद हो जाता है |
  • सुजन एवं गाँठ की समस्या में नौसादर को पीसकर लगाने से सुजन दूर होती है एवं गाँठ पिघल जाती है |
Credit: Mobile Par School

FAQs

  • नौसादर के नुकसान क्या है ?

    यह एक अकार्बनिक खनिज द्रव्य है | अत: चिकित्सक निर्देशित मात्रा से अधिक उपयोग करने पर नुकसान पहुंचा सकता है |

  • नौसादर का दूसरा नाम क्या है?

    Ammonium chloride

  • नौसादर कितने प्रकार का होता है?

    वैद्यक में नौसादर दो प्रकार का कहा गया है । एक कृत्रिम जो और क्षारों से बनाया जाता है, दूसरा अकृत्रिम जो जंतुओं के मूत्र पुरीष आदि के क्षार से निकाला जाता है ।

Leave a Comment

Your email address will not be published.