निक्षालन विधि क्या है, बॉक्ससाइड का सान्द्रण

निक्षालन विधि क्या है:

इस विधि में चूर्णित अयस्क को एक उपयुक्त विलायक के साथ उपचारित किया जाता है। अयस्क इसमें घुलता है जबकि अशुद्धि अघुलनशील रहती है।

उदाहरण के लिए:  बॉक्साइट अयस्क में अशुद्धि के रूप में Fe2O3, SiO2 आदि होती हैं।

इस विधि में अयस्क को किसी उपयुक्त विलायक में घोला जाता है यहाँ विलायक को निक्षालक कहते है।

अयस्क को चूर्णित किया जाता है तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन के साथ उपचारित किया जाता है। अयस्क में उपस्थित Al2O3 तथा SiO2 घुलकर क्रमश: सोडियम एल्युमिनेट तथा सोडियम सिलिकेट बनाती है।

शेष बची अशुद्धियाँ अघुलनशील होती है। अशुद्धियाँ छानी नहीं जाती। छनित में सोडियम एल्युमिनेट तथा सोडियम सिलिकेट को ताजे बने एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड़ के साथ अनेक घण्टों के लिए हिलाया जाता है।

सोडियम एल्युमिनेट, जलअपघटन द्वारा अवक्षेप के रूप में एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड़ बनाता है। एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड़ को मिलाने पर हाइड्रॉक्साइड़ का अवक्षेपण बढ़ता है। विलेय सोडियम सिलिकेट, विलयन में रहता है। जब अवक्षेप को छाना, धोया, शुष्क तथा जलाया जाता है तो शुष्क एल्युमिना (Al2O3). प्राप्त होता है|

बॉक्ससाइड का सान्द्रण:

बॉक्साइड Al का अयस्क है इसमें SiO2 , TiO2 , Fe2O3 की  अशुद्धियाँ होती है इसे NaOH के सान्द्रण विलयन के साथ गर्म करते है जिससे बॉक्साइड तथा SiO2 की शुद्धि NaOH में विलेय हो जाती है जबकि अन्य अशुद्धियाँ छानकर पृथक कर देते है।

Al2O3 + 2NaOH + 3H2O   = 2Na[Al(OH)4]

उपरोक्त विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करते है।

जिससे Al2O3. 3H2O का अवक्षेप बनता है इस अवक्षेप को गर्म करने से एलुमिना प्राप्त होता है।

2Na[Al(OH)4] + 2CO2   = 2NaHCO3 + Al2O3.3H2O

Al2O3.3H2O  = Al2O3  +  3H2O

चांदी तथा सोने का सान्द्रण भी निक्षालन विधि से किया जाता है इस विधि में NaCN निक्षालक काम में लेते है।

4M + 8CN– + 2H2O + O2  = 4[M(CN)2]– + 4OH–

यहाँ M = Ag/Au

2[M(CN)2]–  + Zn  = [Zn(CN)4]2- + 2M

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