फास्फीन (PH3) बनाने की विधि , गुण , उपयोग

फास्फीन जोकि फास्फोरस का एक योगिक है जिसका रासायनिक सूत्र PS3 है यह रंगहीन ज्वलनशील एवं विषैली गैस है और शुद्ध पोस्टिंग अधीन होती है किंतु तकनीकी ग्रेड के नामों ने नए सड़ी मछली जैसी आशिक़े जैसे अत्यंत खराब गंध होती है और इनमें P2 S2 S4 की अति अल्प मात्रा मिली होने पर हवा में तुरंत जल उठती है |

बनाने की विधियां :

  • स्वेत फास्फोरस की क्रिया NaOH के सान्द्र विलयन से करने पर

P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2

  • कैल्शियम फास्फाइड की क्रिया HCl या H2Oसे करने पर

Ca2P2 + 6HCl → 3CaCl2 + 2PH3

Ca3P2 + 6H2O → 3Ca(OH)2 + 2PH3

गुण (properties) :

  1. यह रंगहीन सड़ी मछली के समान गंध युक्त अत्यंत विषैली गैस है।
  2. यह CuSO4 तथा मरक्यूरिक क्लोराइड से निम्न प्रकार से क्रिया करती है।

3CuSO4  + 2PH3 → Cu3P2 + 3H2SO4

3HgCl2 + 2PH3 → Hg3P2 + 6HCl

उपयोग:

इसका उपयोग होम सिग्नल में किया जाता है ,  एक छिद्र युक्त पात्र में कैल्शियम कार्बाइड तथा केल्सियम फास्फाइड लेकर उसे समुद्र में डाल देते हैं ,  यह जल से क्रिया करके गैस बनाते हैं यह ज्वलनशील होती है अर्थार्थ आग को पकड़ लेती है जिससे पानी के जहाज के आगे आने वाले अवरोध के बारे में पता लग जाता है।

संकरण SP3 होता है।

फास्फीन की ज्यामिति पिरामिडी होती है।

credit:Shubham lecturer

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