उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग , स्थायित्व

उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग :

  • औषधि के रूप में (As medicine) :
  1. सिस –  प्लेटिनम का उपयोग ट्यूमर के निदान में किया जाता है
  2. शरीर में कॉपर की अधिकता को कम करने के लिए d- पेनिसिल एमीन से क्रिया की जाती है
  3. लेड ( शीशा) के विषैले पन को दूर करने के लिए EDTA काम में लिया जाता है
  4. शरीर में आयरन की अधिकता को कम करने के लिए डेसफेरीऑक्सिम -B काम में लिया जाता है
  • जैव प्रणाली में (In bio system):
  1. पेड़ पौधों में उपस्थित क्लोरोफिल Mg2+आयन का संकुल यौगिक है जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सहायक है
  2. रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन Fe2+आयन का संकुल यौगिक है जो शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति करता है
  3. विटामिन B-12 में सायनो कोबालेमिनपाया जाता है जो Ca2+आयन का संकुल यौगिक है यह प्रति प्रणाली अरक्तता कारक है
  • उद्योगों में (In the industries):
  1. विलकिंसन उत्प्रेरक का IUPAC नाम क्लोरीडो ट्रिस -(टाई फेनिल फास्फीन ) रोहड़ियम (I) यह एल्कीन का  हाइड्रोजनीकरण करता है
  2. धातुओं की सतह पर Ag अथवा Au की परत चढ़ाने के लिए निम्न संकुल आयन काम में लेते हैं [Ag(CN)2]–  , [Au(CN)2]–
  3. फोटोग्राफी में फिल्म ( नेगेटिव) पर AgBr के क न लगे रहते हैं इस फिल्म को हाइपो के विलियन में डुबो देते हैं जिससे AgBr के कण हट जाते हैं
  4. धातु निष्कर्षण में अशुद्ध निकल का शोधन  मांड विधि से करते हैं
  5. Ag  या Au का निष्कर्षण निक्षालन विधि से किया जाता है
  • गुणात्मक विश्लेषण में (In qualitative analysis):
  1. Ni2+ आयन डाई मेथिल    गलाई  ऑक्सीन (DMG) से क्रिया करके संकुल यौगिक का निर्माण करते हैं जिससे Ni2+ आयन की पहचान की जाती है
  2. कठोर जल में उपस्थित Cl2+आयन  वह मैग्नीशियम आयन की पहचान EDTA द्वारा की जाती है

उपसहसंयोजक यौगिकों का स्थायित्व:

धातू व लिगेंड के मध्य जितना प्रबल बंद बनता है उपसहसंयोजक यौगिक का स्थायित्व उतना ही अधिक होता है इनके स्थायित्व को स्थायित्व स्थिरांक द्वारा व्यक्त करते हैं

यह दो प्रकार का होता है |

  1. पदश: स्थायित्व स्थिरांक
  2. समग्र स्थायित्व स्थिरांक

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