Sthir Anupat Ka Niyam

स्थिर अनुपात का नियम – Sthir Anupat Ka Niyam

Sthir Anupat Ka Niyam:स्थिर अनुपात के नियम परीक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण टॉपिक है. अक्सर स्थिर अनुपात के नियम से सम्बंधित प्रश्न जैसे कि स्थिर अनुपात के नियम के प्रकार आदि  प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान प्रश्न पूछे जाते है. अतः परीक्षार्थियों को स्थिर अनुपात के नियम से जुड़े सभी सम्बंधित प्रश्नों का भलीभांति तैयार कर लेना चाहिए.

Sthir Anupat Ka Niyam

इस नियम के अनुसार, “एक रासायनिक यौगिक में एक ही प्रकार के तत्त्व भारानुसार एक निश्चित अनुपात में जुड़े रहते हैं।’

उदाहरणार्थ— कार्बन डाइऑक्साइड किसी भी विधि से बनाई जाए (वायु में कोयले को गर्म करके, सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करके अथवा कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करके) उसमें सदैव 1 कार्बन परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं तथा ये दोनों सदैव भारानुसार 12 : 32 अथवा 3: 8 के अनुपात में जुड़े रहते हैं।

उदाहरण : H2O में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के भारों का अनुपात = २ : १६ = १ : ८ ; किसी भी स्त्रोत से प्राप्त जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के भारों का अनुपात सदैव १ : ८ रहता है। इसी प्रकार, CO2 में C और O के भारों अनुपात १२ : ३२ = ३ : ८ ; अतः किसी भी विधि प्राप्त CO2 में C तथा O के भारों का अनुपात सदैव ३ : ८ रहेगा।

स्थिर अनुपात का नियम प्राउस्ट ने 1799 ईसवी में दिया।

इस नियम के अनुसार, “एक रासायनिक यौगिक के प्रत्येक अणु में समान तत्व उपस्थित होते हैं तथा उनका द्रव्यमान अनुपात भी निश्चित होता है अथवा किसी योगिक का द्रव्यमानुसार तात्विक संगठन सदैव निश्चित होता है ।”

इस नियम का प्रतिपादन प्राउस्ट ने किया था। कॉपर कार्बोनेट के प्राकृतिक तथा संश्लेषित नमूनों का अध्ययन किया था तथा पाया कि दोनों नमूनों का संगठन समान है।

इस नियम का पुनः निरीक्षण स्टास ने किया जिन्होंने यौगिको का विभिन्न विधियों द्वारा निर्माण किया तथा पाया कि यौगिक का संगठन समान है।

credit:Rajesh Sir Classes

आर्टिकल में आपने स्थिर अनुपात के नियम को पढ़ा। हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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